मोबाइल चोरी की घटना लोगों को बड़ी परेशानी में डाल रही है। बस स्टैंड, रेलवे स्टेशनों या भीड़ भाड़ वाली जगह पर साइबर शातिरों का गैंग एक्टिव है। इस गैंग के सदस्य भीड़ भाड़ का फायदा उठाकर यात्रियों का मोबाइल चुरा लेते हैं। इसके तुरंत बाद मोबाइल का पासवर्ड
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बैंक जाने की परेशानी से बचने के लिए लोग लगभग सारे काम मोबाइल से करते। सभी ट्रांजैक्शन से लेकर नेट बेंकिंग, यूपीआई समेत बड़े-बड़े लेनदेन भी मोबाइल से ही कर लेते। साइबर फ्रॉड इसका फायदा उठा लेते हैं। एक ओटीपी और आधार नंबर के जरिए लोगों का लाखों रुपए उड़ा लेते हैं।
कैसे करते हैं पैसा गायब
साइबर और आईटी एक्सपर्ट राजन सिंह ने बताया कि मोबाइल चोरी करने के बाद साइबर अपराधी मोबाइल का लॉक खोलते हैं। इसके लिए रेगुलर जैसे 1111, 0000, 1234, 2580 ट्राई करते हैं। कई अटेंप्ट लेते हैं। कई लोग याद रखने के लिए आसान पासवर्ड रख लेते हैं। शातिर अपराधी इस ट्रिक से कई लोगों का मोबाइल अनलॉक करके उस मोबाइल में इस्तेमाल हो रहे ऑनलाइन पेइंग एप के माध्यम से आसानी से किसी को भी पैसा ट्रांसफर कर देते हैं।
साइबर और आईटी एक्सपर्ट राजन सिंह।
अगर किसी का ऑनलाइन पेइंग ऐप लॉक है तो अपराधी उसे रीसेट करते हैं। रीसेट करने के बाद रीसेट पासवर्ड भी उसी मोबाइल में आता है, इसी का फायदा साइबर फ्रॉड करने वालों को मिल जाता है। अपराधी आपका पैसा कहीं भी ट्रांसफर कर लेते हैं।
कुछ दिन पहले तक सिम स्वेपिंग के जरिए साइबर अपराधी पैसा गायब कर रहे थे। अपराधी सिम बेचने वाले से सेटिंग करके किसी के नाम से उसका डुप्लीकेट सिम निकाल लेते थे। सभी ओटीपी इसी नए नंबर पर आना शुरू हो जाता था। अपराधी फिर उस आदमी के खाते से पैसा कहीं भी ट्रांसफर कर देते हैं। लेकिन अब सरकार नए सिम के एक्टिवेशन में 24 घंटे का समय ले रही है।

7 और 8 फरवरी को साइबर पुलिस की कार्रवाई
7 और 8 फरवरी को साइबर पुलिस ने मोबाइल चुराकर पैसा गायब करने वाले इसी गैंग के 3 सदस्यों को गिरफ्तार किया था। इनकी गिरफ्तारी के लिए भागलपुर, बांका, कहलगांव, हाजीपुर, पटना सिटी में छापेमारी की। पुलिस ने बांका से नीतीश, शिलंधर मंडल को गिरफ्तार किया। तीनों की निशानदेही पर पटना सिटी से रौशन को पकड़ा। नीतीश शिलंधर का साला है। नीतीश और शिलंधर के पास से पुलिस ने कुछ कैश और 9 मोबाइल फोन बरामद किए हैं। रौशन की निशानदेही पर पुलिस पटना और आसपास 3 से 4 जगह छापेमारी की है। पुलिस ने इनसे इस गैंग के बाकी सदस्यों को लेकर पूछताछ की। कुछ लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ भी हुई।
फोन-पे नंबर ने पकड़वाया
इस मामले की छानबीन साइबर थाना ने शुरू की। पुलिस ने रोहित के फोन पे का ट्रांजेक्शन हिस्ट्री चेक किया। इसके फोन-पे से पैसा एक फोन पे के माध्यम से ही भेजा गया था। पुलिस को उस फोन से संबंधित मोबाइल नंबर मिल गया, जिस पर पैसे ट्रांसफर किया गया था। पुलिस ने उस नंबर को लोकेट किया। लगातार लोकेशन चेंज हो रहा था। पुलिस तीन दिनों तक लोकेशन का पीछा करती रही। कई जगह छापेमारी हुई। तब जा कर पहला सदस्य पकड़ में आया। इसी आधार पर पुलिस ने बाकी की गिरफ्तारियां की।

कैसे हुई गिरफ्तारी
रोहित के फोन-पे से जिस खाता पर पैसा भेजा था, उसका पीछा करते करते हुए पुलिस बांका पहुंची। बांका के रहने वाले विवेक के फोन पे पर पैसा ट्रांसफर किया गया। विवेक वहीं पर एक कैफे चलाता है। पुलिस के पूछताछ में उसने बताया कि ये पैसा मैंने निकालकर बांका के ही शिलंधर मंडल को दे दिया। उसने मुझे खुशी से 1000 रुपया दिए। पुलिस ने विवेक को बॉन्ड भरवाकर छोड़ दिया। पुलिस ने शिलंधर को पकड़ा। शिलंधर ने बताया कि उसने पैसा अपने साले नीतीश के खाते में डाल दिया। इसके बदले मुझे 2000 रुपए मिले।
तीनों जेल में हैं
शिलंधर इस गैंग का सदस्य था। उसका काम किसी किसी के खाते में झूठ बोलकर पैसा मंगाना था। उस पैसे में कुछ अपने पास रखकर बाकी का पैसा आगे नीतीश को भेज देता था। पुलिस ने नीतीश को भी बांका से ही गिरफ्तार किया। नीतीश ने बताया कि वो पैसा रौशन को भेज देता है। इसके बदले मुझे पैसे का 15 परसेंट मिल जाता है। पुलिस ने कई जगह छापेमारी कर पटना सिटी के मारूफगंज से रौशन को गिरफ्तार कर लिया। फिलहाल रौशन, नीतीश और शिलंधर मंडल जेल में हैं।
4 फरवरी को रोहित कुमार सुबह चार बजे दानापुर सहरसा एक्सप्रेस पर चढ़े। उनको हाजीपुर जाना था। वह एक सीट पर बैठ गए। स्टेशन के बाहर से ही एक लड़का उनके पीछे लग गया। लड़का उसके पीछे ट्रेन में चढ़ा और उनके सामने बैठ गया। रोहित ने जैसे ही टाइम देखने के लिए मोबाइल निकाला तभी सामने बैठे लड़के ने उनके हाथ से फोन झपट लिया। वह प्लेटफॉर्म के दूसरी तरफ उतरकर दूसरे प्लेटफार्म पर लगी ट्रेन में चढ़ गया।
24 हजार निकाले थे
रोहित ट्रेन से उतरता तब तक लड़का कहीं फरार हो गया। रोहित ने तुरंत इसकी सूचना जीआरपी को दी। नया सिम खरीद लिया। 24 घंटे में सिम एक्टिवेट होने के बाद ही मैसेज से पता चला कि 24 हजार रुपया निकाला गया है। जिसमें बाद साइबर थाना में इसकी सूचना दी। इसी मामले की छानबीन करते हुए इन तीन लोगों को पकड़ा है। पुलिस मोबाइल चोरी करने वालों सदस्यों को भी गिरफ्तार करने में लगी हुई है।
इसके अलावा हाल के 3 बड़े मामले हैं, जिसमें अब तक रिकवरी नहीं हुई है। इसमें एक व्यक्ति के मोबाइल से 3.4 लाख रुपए निकाल लिए गए थे। जबकि दूसरे के 90 हजार निकाले थे। वहीं, तीसरे के 49 हजार रुपए निकाले गए थे।
पहला मामला
28 दिसंबर को चांदी वाजिद हुसैन ने रेल पटना साइबर थाना में अपने रियलमी फोन के चोरी होने की सूचना दी थी। वाजिद ने बताया कि वह सीवान का है। आवेदन के मुताबिक, 27 दिसंबर को उपासना एक्सप्रेस से उतरने के दौरान पटना स्टेशन पर किसी ने उनका फोन चोरी कर लिया। जब वाजिद ने दोबारा अपना सिम चालू कराया तो पाया कि उसके खाते से 3,04,307 रुपया गायब है। इसके बाद शिकायत की। शिकायत के बाद रेल पटना साइबर थाना के डीएसपी के नेतृत्व में एक टीम गठित कर इस मामले की छानबीन शुरू की गई। छानबीन में पता चला कि वाजिद का खाता केनरा बैंक में है। वहीं से पैसा निकासी का डिटेल लिया गया।
वाजिद के खाते से किसी खुशी यादव के उत्तर प्रदेश के खाते में 2 बार 99000, 99000 और दीपेश्वर कुमार के रायपुर के खाते में 99000 रुपया भेजा गया है। बाकी के बचे पैसे 2 से 3 लोगों के खाते में यूपीआई के माध्यम से भेजा गया था। फिर खुशी यादव के अकाउंट से 198000 रुपए रविन्द्र चौधरी के अकाउंट में ट्रांसफर किया गया था, जिसे रविन्द्र चौधरी ने अपने भाई दिनेश के साथ नगद पैसे बैंक से निकाल लिए थे। ये दोनों नालंदा के रहने वाले थे। दोनों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। दोनों ने बताया है कि वो बिना किसी कागज के लेन ‘देन का कारोबार करते हैं। फिलहाल दीपेश्वर को पुलिस नहीं पकड़ पाई है, लेकिन दीपेश्वर के खाते को फ्रीज करा दिया गया है। लेकिन अभी तक वाजिद हुसैन को पैसा नहीं मिला है।
दूसरा मामला
अरुण कुमार साह का मोबाइल 2 जनवरी को दानापुर स्टेशन जाने के दौरान चोरी हो गया। बदमाशों ने मोबाइल से 90,000 रुपए निकाल लिए। इस मामले में अरुण ने कोतवाली थाने में मामला दर्ज कराया। जिसे बाद में साइबर थाना में ट्रांसफर कर दिया गया। मामले के उद्भेदन के लिए साइबर पुलिस उपाधीक्षक के नेतृत्व में टीम का गठन किया गया। जांच में यह बात सामने आई कि मोबाइल चोरी होने के बाद अज्ञात साइबर अपराधी ने तीन बार में 90,000 रुपया दूसरे के खाता में ट्रांसफर किया। फिर उस खाते से पैसा निकाल लिया। इसमें में भी कोई रिकवरी नहीं हुई है।

साइबर डीएसपी राघवेंद्र मणि त्रिपाठी।
तीसरा मामला
17 जनवरी को विकास कुमार वाराणसी से पटना पहुंचे। पटना स्टेशन से अगमकुआं जाने के लिए ऑटो में बैठ गए। जैसे ही वो अपना जगह पर उतर रहे थे बाइक सवार दो बदमाशों ने उनका मोबाइल झपट लिया। विकास कुमार ने 20 मिनट के अंदर अपना सिम लॉक करा दिया। उसके बाद दूसरा सिम लेने के साथ ही उनके मोबाइल पर मैसेज आया कि उनके खाते से 49000 रुपए निकाल लिए गए हैं। जिसकी शिकायत पटना साइबर थाने में की गई थी। बाद में पुलिस ने जांच कर दो शातिरों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। आरोपियों ने पैसा खर्च कर दिया। जिससे पैसे की रिकवरी नहीं हो रही।
साइबर डीएसपी सह पटना साइबर थाना के थानाध्यक्ष राघवेंद्र मणि त्रिपाठी ने बताया कि इन दिनों मोबाइल की चोरी को सिर्फ चोरी समझना भारी पड़ जाएगा। चंद मिनटों में आपका बैंक अकाउंट खाली हो जाएगा। शातिरों के पास जैसे ही कोई मोबाइल हाथ लगता है। वो पासवर्ड रिसेट कर देते हैं। आपके मोबाइल में पेटीएम या फोन पे को क्लोन कर अपने मोबाइल पर आपके मोबाइल का सभी ऐप ट्रांसफर कर देते हैं। वहां से अलग-अलग लोगों को या किसी दुकान से ज्यादा अमाउंट की खरीदारी कर लेते हैं।
साइबर डीएसपी ने बताया कि इसका बचाव है कि आप अपना पासवर्ड स्ट्रॉन्ग रखें। पैटर्न टाइप पासवर्ड या किसी का नाम पासवर्ड ना रखें। अपनी गोपनीयता का ध्यान सार्वजनिक जगहों जरूर रखें।