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famous chhath ghat in bihar: एक घाट से ऐसी मान्यताओं जुड़ी है कि, इस मंदिर को भगवान विश्वकर्मा ने एक ही रात में तैयार किया था. मंदिर का मुख पूर्व की ओर न होकर पश्चिम की तरफ है, जो इसे और भी खास बनाता है. हर साल छठ महापर्व पर यहां अनगिनत श्रद्धालुओं का जमावड़ा लगता है.
25 अक्टूबर को नहाए खाए से शुरू हो रहा बिहार का महापर्व छठ 27 अक्टूबर को संपन्न हो रहा है. आदि काल से चले आ रहे इस पर्व की महिमा इतनी अपार है कि अब इसे दुनिया भर के कई देशों में भी मनाया जाने लगा है.

पूरी तरह से प्रकृति को समर्पित इस पर्व में सूर्य को अर्घ्य देने के लिए वैसे तो हर एक घाट पर लाखों श्रद्धालु एकत्रित होते हैं, लेकिन आज हम आपको बिहार के ऐसे पांच घाट की जानकारी दे रहे हैं, जिसकी प्रसिद्धि पूरे देश भर में है.

सबसे पहले बात करें बिहार के आरा ज़िले में स्थित बेलाउर घाट की तो यह घाट अपनी प्राचीनता और धार्मिक महत्व के लिए जाना जाता है. यहां भगवान सूर्य को समर्पित एक प्राचीन मंदिर है, जिसकी वजह से इस नगर को भगवान भास्कर की नगरी के नाम से भी जाना जाता है.

जानकार बताते हैं कि प्राचीन काल में यहां के राजा ने 52 तालों को निर्माण करवाया था, जिनमें से एक ताल के बीच में सूर्य देव का मंदिर स्थापित किया गया था. चूंकी छठ महापर्व में भगवान सूर्य को ही अर्घ्य देकर व्रत को संपन्न किया जाता है, इसलिए हर वर्ष इस घाट पर व्रतियों की बड़ी संख्या देखी जाती है.

औरंगाबाद का देव सूर्य मंदिर भी छठ पूजा के लिए बेहद प्रसिद्ध है. यह बिहार के उन प्राचीन स्थलों में से एक है, जिसकी प्रसिद्धि न सिर्फ धार्मिक रूप से है बल्की, इसे वास्तुकला के भी एक शानदार नमूने के रूप में देखा जाता है.

यहां से जुड़ी मान्यताओं के बारे में जानकार बताते हैं कि, इस मंदिर को भगवान विश्वकर्मा ने एक ही रात में तैयार किया था. मंदिर का मुख पूर्व की ओर न होकर पश्चिम की तरफ है, जो इसे और भी खास बनाता है. हर साल छठ महापर्व पर यहां अनगिनत श्रद्धालुओं का जमावड़ा लगता है.

इसी प्रकार पटना का कंगन घाट भी छठ पूजा के दौरान प्रदेश का सबसे प्रसिद्ध केंद्र बन जाता है. गंगा नदी के तट पर स्थित यह घाट अपनी स्वच्छता, अनुशासन और विशाल आयोजन के लिए जाना जाता है. पूजा के दौरान शाम और सुबह के समय अनगिनत श्रद्धालु जब सूर्य देव को अर्घ्य देते हैं, तो पूरा वातावरण आस्था और भक्ति से झूम उठता है.

धार्मिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण गया का सूर्य घाट छठ पूजा के दौरान इतना भव्य दिखने दिखने लगता है, जिसकी कल्पना भी कोई नहीं कर सकता. फल्गु नदी के किनारे सजे दीपक और भगवान सूर्य की उपासना में महिलाओं द्वारा गाया जा रहा लोकगीत वातारण को एकदम शांत और पवित्र बना देता है.

हाजीपुर स्थित कोनहारा घाट भी छठ पूजा और यहां आने वाले अनगिनत श्रद्धालुओं के लिए बेहद प्रसिद्ध है. गंडक और गंगा के संगम पर स्थित यह घाट एक पवित्र त्रिवेणी स्थल भी है. लोक आस्था के महापर्व छठ के दौरान यहां का वातावरण बेहद अदभुत और पवित्र हो जाता है.

बिहार के इन प्रसिद्ध छठ घाट स्थलों में मुंगेर का कष्टहरणी घाट भी शुमार है. कई प्राचीन मान्यताओं से घिरा यह घाट गंगा नदी के तट पर स्थित है. जानकार बताते हैं कि त्रेता युग में भगवान राम ने ताड़का का वध करने के बाद पाप मुक्ति के लिए इसी घाट पर स्नान किया था. छठ महापर्व के पावन अवसर पर लाखों श्रद्धालु यहां आकर गंगा में डुबकी लगाते हैं और भगवान सूर्य की उपासना करते हैं.