राजद सुप्रीमो लालू यादव ने सोमवार को पार्टी कार्यालय पहुंचकर राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल किया। इस दौरान उनके छोटे बेटे और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव सहित पार्टी के तमाम वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
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माना जा रहा है कि लालू यादव का एक बार फिर राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना तय है। 5 जुलाई को उन्हें औपचारिक रूप से इस पद पर घोषित किया जाएगा।
नामांकन करने के बाद तेजस्वी यादव ने कहा–
लालू जी ने राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए नामांकन भरा है। सभी कार्यकर्ताओं में एक खुशी की लहर है। 12 टर्म उन्होंने राष्ट्रीय अध्यक्ष रहते हुए पूरा किया है। आने वाले समय में उनके रहते हुए हमें पूरी उम्मीद है की जीत मिलेगी।
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राजद में इन दिनों सांगठनिक चुनाव की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। हाल ही में पार्टी ने अति पिछड़ा वर्ग से आने वाले मंगनी लाल मंडल को बिहार प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है। उन्होंने जगदानंद सिंह की जगह ली है, जो पिछले कुछ महीनों से पार्टी गतिविधियों से दूरी बनाए हुए थे।
पार्टी में नेतृत्व को लेकर एक राय
राजद के प्रधान महासचिव अब्दुल बारी सिद्दीकी ने रविवार को स्पष्ट किया था कि राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर लालू यादव ही बने रहेंगे। उन्होंने कहा, “पार्टी के सभी नेता और कार्यकर्ता इस बात पर पूरी तरह एकमत हैं कि लालू जी ही पार्टी का नेतृत्व करें।”

नामांकन कराने पहुंचे लालू यादव के साथ बेटे तेजस्वी यादव।
उन्होंने यह भी बताया कि “स्वास्थ्य कारणों से भले ही लालू यादव सार्वजनिक तौर पर कम सक्रिय दिखते हों, लेकिन पार्टी के सभी बड़े फैसले उनकी निगरानी में ही लिए जा रहे हैं।”
‘कोई भ्रम नहीं, पूरी स्पष्टता’
सिद्दीकी ने पार्टी में किसी भी प्रकार की भ्रम की स्थिति से इनकार करते हुए कहा कि लालू यादव के नेतृत्व को लेकर कोई असमंजस नहीं है। “लालू जी आज भी पार्टी की दिशा और रणनीति तय कर रहे हैं।स्वास्थ्य कारण जरूर हैं, लेकिन उससे नेतृत्व पर कोई असर नहीं पड़ा है।”
जगदानंद सिंह पर भी बोले सिद्दीकी
राष्ट्रीय स्तर पर वरिष्ठ नेता जगदानंद सिंह की भूमिका को लेकर पूछे गए सवाल पर सिद्दीकी ने कहा था कि यह पूरी तरह पार्टी का आंतरिक मामला है। “जगदानंद सिंह हमारे सुख-दुख के साथी हैं। पार्टी तय करेगी कि उन्हें आगे क्या भूमिका दी जाएगी।”
28 साल से संभाल रहे नेतृत्व
लालू यादव ने 1997 में जनता दल से अलग होकर आरजेडी का गठन किया था और तभी से वे पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने हुए हैं। बीते 28 वर्षों में वे लगातार इस पद पर बने हुए हैं। पार्टी में हो रहे इस सांगठनिक पुनर्गठन को आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनाव की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है।