गोरखपुर में दीवाली के मौके पर घरों की सजावट में बदलाव देखने को मिल रहा है। लोग अब पर्दे, सोफा कवर और कुशन कवर को वास्तु के अनुसार चुन रहे हैं। इंटीरियर्स में कस्टमाइजेशन की मांग बढ़ी है, जिससे…
गोरखपुर, वरिष्ठ संवाददाता दीवाली में घरों की बाहरी और अंदरूनी दीवारें ही नहीं रंग बदल रही हैं, इंटीरियर में भी बदलाव काफी सोच समझकर किया जा रहा है। अब वास्तु के हिसाब से कमरे में पर्दा, सोफा से लेकर कुशन कवर लिया जा रहा है। तमाम ऐसे भी ग्राहक हैं जो पर्दे को कस्टमाइज करा रहे हैं। पिछले तीन साल में पर्दा, सोफा कवर से लेकर कुशन कवर की कीमतों में ज्यादा इजाफा नहीं होने से खरीदारी भी आसान हुई है।
दीवाली में मां लक्ष्मी के स्वागत के लिए घर से लेकर कार्यालयों का लुक बदला जा रहा है। गोलघर, हिन्दी बाजार, आर्यनगर से लेकर मेडिकल रोड पर इंटीरियर की दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ दिख रही है। आईटी कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर आकाश श्रीवास्तव का कहना है कि पर्दे से लेकर सोफा कवर आदि आंखों को सुकून भी देते हैं। ऐसे में पर्दा के रंग का विशेष जोर होता है। इसका भी ख्याल रखा है कि जैसा परदा मेरे कमरे में हो वैसा दूसरी जगह नहीं दिखे।
वहीं होटल कारोबारी स्वतंत्रवीर का का कहना है कि होटल में दूर दराज से आने वाले ग्राहकों को रंग से सकून मिलता है। ऐसे में पर्दा ही नहीं दीवारों के रंग को लेकर भी काफी प्रयोग करना पड़ रहा है। तारामंडल क्षेत्र में नया मकान बनवाने वाले अतुल वर्मा का कहना है कि वास्तु के हिसाब से पर्दा, सोफा कवर से लेकर वाल पेपर का रंग तय किया है। कैटलॉग से परदा देखा तो पसंद नहीं आया। इसके बाद एआई की मदद से परदे का रंग चयन किया। कमरे और परदे में मैचिंग के बाद पूरी इंटीरियर बदला-बदला लग रहा है।
पसंद के हिसाब से कस्टमाइज्ड पर्दा
पर्दा से लेकर सोफा कवर आदि को लेकर बड़े ब्रांड भी मार्केट में आ गए हैं। अब लोग अपनी पसंद के हिसाब से कस्टमाइज्ड पर्दा बनवा रहे हैं। मेडिकल रोड पर इंटीरियर कारोबारी निखिल श्रीवास्तव कहते हैं कि अब लोग कार्यालय ही नहीं, घरों में भी पर्दे से लेकर सारे इंटीरियर को कस्टमाइज्ड करा रहे हैं। उनकी सोच है कि उनके घर जैसा इंटीरियर कहीं और नहीं दिखे।
इंटीरियर और वास्तु के लिए विशेषज्ञ
इंटीरियर की दुकानों पर अब इंटीरियर डिजाइनर के साथ ही वास्तु के विशेषज्ञ भी रखे जा रहे हैं। वहीं वास्तु विशेषज्ञों का मांग बढ़ी है। आर्किटेक्ट मनीष मिश्रा का कहना है कि लोग किचेन, ड्राइंग रूम, टॉयलेट तो वास्तु के हिसाब से बनवा ही रहे हैं। इंटीरियर में भी वास्तु की सलाह ले रहे हैं। वास्तु विशेषज्ञ अब फीस लेकर परामर्श ले रहे हैं।
कारोबारी बयां कर रहे बदलाव
गीता प्रेस मार्केट में अनमोल अग्रवाल का कहना है कि अब तो कमरों के हिसाब से पर्दे बिक रहे हैं। बच्चों, बुजर्ग से लेकर महिलाओं के के हिसाब से पर्दे बनने लगे हैं। बच्चे, बड़े एवं बुजुर्ग सभी के लिए उनकी पसंद के अनुसार पर्दों में प्रिंट आते हैं। कारोबारी सुधा मोदी का कहना है कि लंबे समय तक लोग एक कलर के पर्दे के साथ नहीं रह सकते हैं। लोग कैटलाग से अपनी पसंद के हिसाब से कस्टमाइज्ड पर्दे बनवा रहे हैं। परदे में प्रकृति और परिवार के सदस्यों की तस्वीर भी लोग चाहते हैं। राशि और वास्तु के हिसाब से रंग तय हो रहे हैं। अनिल मोदी कहते हैं कि अब 70 फीसदी मार्केट बड़े ब्रांड का है। लोग कार्यालय से लेकर घरों के लिए इंटीरियर डिजाइनर की डिमांड कर रहे हैं। लोगों का चाहत रहती है कि उनके जैसा इंटीरियर दूसरे घरों में नहीं दिखे। इसके लिए लोग कीमत देने को तैयार हैं। वहीं होलसेल मार्ट के विभोर पोद्दार का कहना है कि मंदिर वाले कमरे के लिए लोग पीला और लाल रंग का पर्दा पसंद कर रहे हैं। पढ़ाई वाले कमरे के लिए क्रीम कलर के पर्दे की मांग है। वाल पेपर और फर्श फ्लोरिंग को लेकर भी लोग पसंद से समझौता नहीं कर रहे हैं।