जमुई के बरहट प्रखंड स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय देवाचक की स्थिति बदहाल है। यहां लगभग 300 बच्चे जर्जर और असुरक्षित भवन में पढ़ने को मजबूर हैं। विद्यालय में केवल दो कमरों में पढ़ाई कराई जा रही है, जिससे बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो रही है। कई बार छात्रों को पास के उच्च विद्यालय में स्थानांतरित करना पड़ता है, लेकिन वहां भी पर्याप्त व्यवस्था न होने के कारण उनकी पढ़ाई बाधित होती है। विद्यालय परिसर में गंदगी का अंबार है और बच्चों के बैठने की उचित व्यवस्था नहीं है। उन्हें मजबूरन जर्जर छत पर बैठकर मध्याह्न भोजन करना पड़ता है। मध्याह्न भोजन योजना भी सवालों के घेरे में है। बच्चों का आरोप है कि उन्हें नियमित रूप से दाल नहीं दी जाती, बल्कि सिर्फ चावल और आलू-चना की सब्जी परोसी जाती है। रसोइया ने बताया कि प्रधानाध्यापक का कहना है कि दाल ऊपर विभाग द्वारा उपलब्ध नहीं कराई जाती है। शनिवार को खिचड़ी में ही कभी-कभार दाल मिलती है। स्कूल परिसर में जानवरों का खुला आना-जाना लगा रहता है। बकरियां बच्चों के पास तक पहुंच जाती हैं और बचे हुए भोजन को खाते देखी गईं। इससे न केवल गंदगी बढ़ती है, बल्कि बच्चों के स्वास्थ्य पर भी खतरा मंडरा रहा है। मीडिया के पहुंचने पर शिक्षामित्र दिलीप कुमार टूटुडू स्कूटी से 16 दर्जन केले लाते हुए देखे गए। उन्होंने बताया कि ये केले मध्याह्न भोजन में देने के लिए लाए जा रहे थे, लेकिन देरी के कारण बच्चों को छुट्टी के समय दिए जाएंगे। रसोइया ने स्पष्ट किया कि उन्हें वही बनाना पड़ता है जो प्रधानाध्यापक द्वारा उपलब्ध कराया जाता है। विद्यालय में कुल 10 शिक्षक हैं, लेकिन अधिकांश के प्रशिक्षण में रहने के कारण पढ़ाई प्रभावित हो रही है। प्रभारी शिक्षक बिरजू कुमार ने भवन की जर्जर स्थिति स्वीकार की, लेकिन मिड डे मील को लेकर उनका दावा जमीनी सच्चाई से मेल नहीं खाता। यह स्थिति न केवल शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है, बल्कि बच्चों के भविष्य के साथ हो रहे खिलवाड़ को भी उजागर करती है। अब जरूरत है कि प्रशासन तत्काल हस्तक्षेप कर इस स्कूल की बदहाली दूर करे।
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