बेगूसराय के भगवानपुर प्रखंड में नीलगायों (घोड़परास) के आतंक से परेशान किसानों के लिए शनिवार का दिन बड़ी राहत लेकर आया। वन विभाग की टीम ने एक विशेष अभियान चलाकर महज 6 घंटे के भीतर 58 नीलगायों को ढेर कर दिया। सरकार के निर्देश पर चलाए गए इस शूट आउट ऑपरेशन से उन किसानों की उम्मीदें जागी हैं, जिनकी खून-पसीने की कमाई ये जंगली जानवर पल भर में उजाड़ रहे थे। भगवानपुर प्रखंड के 15 पंचायतों में पिछले कई महीनों से नीलगायों ने कोहराम मचा रखा था। शनिवार दोपहर करीब 12 बजे वन विभाग की टीम रसलपुर पंचायत के औगान और रसलपुर बहियार इलाके में पहुंची। वन विभाग के शूटर शक्ति कुमार के नेतृत्व में जैसे ही बंदूकें गरजी, नीलगायों के झुंड में भगदड़ मच गई। शाम करीब 6 बजे तक चले अभियान में 58 जानवरों को मार गिराया गया। स्थानीय किसान भी मौके पर मौजूद रहे इस दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय किसान भी मौके पर मौजूद रहे, जो अपनी बर्बाद होती फसलों का मंजर देख प्रशासन से लंबे समय से कार्रवाई की गुहार लगा रहे थे।दरअसल नीलगायों की बढ़ती संख्या और आतंक के कारण किसान खेती छोड़ने को मजबूर हो रहे थे। रसलपुर पंचायत के मुखिया लक्ष्मण कुमार राय ने किसानों की बदहाली को देखते हुए वन विभाग को लिखित आवेदन दिया था। उन्होंने मांग की थी कि अगर समय रहते इन्हें नियंत्रित नहीं किया गया, तो प्रखंड के हजारों किसान आर्थिक रूप से बर्बाद हो जाएंगे। किसानों का कहना है कि नीलगाय न सिर्फ फसलों को चरती हैं, बल्कि दौड़ते समय पैरों से कुचलकर पूरी फसल बर्बाद कर देती हैं। दलहन, तेलहन और मक्के की खेती करने वाले किसानों के लिए ये जानवर दुश्मन बन चुके हैं। खून-पसीना से सींचा गया फसल बर्बाद हो रहा है। मुखिया ने बताया कि बिहार सरकार ने नीलगायों द्वारा फसलों को पहुंचाए जा रहे नुकसान को देखते हुए इन्हें नियंत्रित करने का विशेष प्रावधान किया है। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जहा-जहां से शिकायतें मिल रही हैं, वहां आकलन के बाद शूटरों की मदद से अभियान चलाया जा रहा है। भगवानपुर में शूटर शक्ति कुमार की टीम ने प्रोफेशनल तरीके से इस ऑपरेशन को अंजाम दिया। जिससे किसी इंसान या पालतू पशु को नुकसान नहीं पहुंचे। मारे जाने के बाद सभी को अलग-अलग जगहों पर जेसीबी की मदद से दफन कर दिया गया है। इधर, 58 नीलगायों के मारे जाने के बावजूद ग्रामीणों का मानना है कि खतरा अभी टला नहीं है। किसानों के अनुसार अभी भी कई बहियारों में नीलगायों के झुंड सक्रिय हैं। रात के समय ये जानवर अंधेरे का फायदा उठाकर हमला करते हैं। सिर्फ एक दिन के अभियान से समस्या जड़ से खत्म नहीं होगी। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि इस अभियान को प्रखंड की अन्य पंचायतों में भी विस्तार दिया जाए और नियमित अंतराल पर ऐसी कार्रवाई की जाए। किसानों की फसलों को बचाने के लिए यह कठोर कदम उठाना अनिवार्य है। फिलहाल वन विभाग की इस कार्रवाई ने उन किसानों के चेहरे पर मुस्कान लौटा दी है जो कर्ज लेकर खेती कर रहे थे।
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