West Bengal Election 2026 Junglemahal: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और नामों को हटाये जाने पर राजनीतिक घमासान मचा है. लेकिन जंगलमहल के 3 जिलों- झारग्राम, पुरुलिया और बांकुड़ा में तस्वीर बिल्कुल अलग है.
यहां चुनावी रैलियों में नागरिकता और वोटर लिस्ट जैसे ‘हवा-हवाई’ मुद्दों की बजाय ‘ब्रेड एंड बटर’ यानी रोजी-रोटी और बुनियादी जरूरतों पर फोकस है. ग्राउंड रिपोर्ट बताती है कि यहां के लोगों के लिए पानी, जंगल के अधिकार और मजदूरी सबसे बड़े चुनावी हथियार हैं, न कि मतदाता सूची से जुड़े प्रशासनिक विवाद.
SIR का मुद्दा यहां क्यों है बेअसर?
बंगाल के अन्य जिलों के मुकाबले इन 3 जिलों में मतदाता सूची से नाम हटाये जाने की दर बहुत कम है. इसलिए यहां के मतदाता इस मुद्दे को लेकर आशंकित नहीं हैं. सीमावर्ती जिलों के विपरीत यहां के निवासियों की नागरिकता को लेकर कोई बड़ा विवाद या ‘घुसपैठिया’ कार्ड काम नहीं कर रहा है.
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जंगलमहल की अपनी ‘जमीनी’ चुनौतियां
झारग्राम, पुरुलिया और बांकुड़ा की जनता के लिए इस चुनाव में असली मुद्दे क्या हैं?
- रोजी-रोटी और मजदूरी : चाय बागानों (पुरुलिया के कुछ हिस्सों) और जंगल आधारित उत्पादों (लघु वनोपज) पर निर्भर आबादी के लिए न्यूनतम मजदूरी और रोजगार की कमी सबसे बड़ी चिंता है.
- पानी का संकट : बांकुड़ा और पुरुलिया के कई इलाके गर्मियों में भीषण जल संकट झेलते हैं. लोगों का कहना है कि उन्हें ‘लिस्ट’ में नाम रहने से ज्यादा घर के पास ‘नल से जल’ की जरूरत है.
- कुर्मी और आदिवासी पहचान : इन जिलों में जातीय पहचान और कुर्मी समुदाय की मांगों का प्रभाव SIR जैसे मुद्दों से कहीं ज्यादा बड़ा है.
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सियासी दलों की मजबूरी : बदलना पड़ा नैरेटिव
जमीन पर लोगों का मूड भांपते हुए तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) दोनों ने ही अपनी रणनीति बदल दी है. BJP का फोकस केंद्र की कल्याणकारी योजनाओं और भ्रष्टाचार के मुद्दों पर है. ममता बनर्जी की पार्टी TMC ‘लक्ष्मी भंडार’ और स्थानीय विकास का दांव खेल रही है. दोनों ही दलों के स्थानीय नेताओं का मानना है कि यहां ‘मतदाता सूची’ का डर दिखाकर वोट हासिल करना मुश्किल है, क्योंकि लोग अपनी मूलभूत समस्याओं के समाधान की उम्मीद कर रहे हैं.
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West Bengal Election 2026 Junglemahal: वोटरों का साफ संदेश- हमें काम चाहिए
जंगलमहल के युवा वोटरों का कहना है कि वे किसी भी ‘पहचान की राजनीति’ में फंसने की बजाय शिक्षा और नौकरी के अवसरों को प्राथमिकता देंगे. यह शांतिपूर्ण और मुद्दों पर आधारित चुनाव इस बात का संकेत है कि जंगलमहल अब बंगाल की मुख्यधारा की राजनीति से अलग अपनी विकास की नयी इबारत लिखना चाहता है.
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