पोस्टल बैलेट में भी एनडीए की बढ़त
नालंदा जिले में हुए विधानसभा चुनावों में पोस्टल बैलेट के जरिए हुए मतदान में भी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने अपना वर्चस्व कायम रखा है। जिले की सातों विधानसभा सीटों पर कुल 6304 पोस्टल बैलेट डाले गए, जिसमें एनडीए को 3456 वोट मिले, जबकि महागठबं
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चुनावी नतीजों में एक चौंकाने वाला तथ्य यह सामने आया है कि पोस्टल बैलेट के माध्यम से 10 प्रत्याशियों को एक भी वोट नहीं मिला। इनमें हिलसा से दो, नालंदा से तीन, हरनौत से दो और इस्लामपुर से तीन प्रत्याशी शामिल हैं। यह स्थिति इन उम्मीदवारों की जमीनी स्तर पर कमजोर पकड़ को उजागर करती है।
बिहारशरीफ के डॉ. सुनील कुमार ने मारी बाजी
पोस्टल बैलेट में सर्वाधिक वोट हासिल करने की होड़ में बिहारशरीफ विधानसभा से एनडीए के डॉ. सुनील कुमार शीर्ष पर रहे। उन्हें 573 डाक मतपत्रों से वोट मिले। इस्लामपुर के रुहैल रंजन ने 569 वोटों के साथ दूसरा स्थान हासिल किया। दोनों के बीच केवल तीन वोटों का अंतर रहा, जो कड़े मुकाबले का संकेत देता है।
नोटा को भी मिले 55 वोट
दिलचस्प बात यह है कि 55 मतदाताओं ने नोटा (None of the Above) विकल्प चुना। यह दर्शाता है कि कुछ मतदाता किसी भी प्रत्याशी से संतुष्ट नहीं थे और उन्होंने अपने असंतोष को व्यक्त करने के लिए नोटा का विकल्प चुना।
नोटा को भी मिले हैं 55 वोट
विधानसभावार पोस्टल बैलेट का विश्लेषण
बिहारशरीफ विधानसभा में सर्वाधिक 1095 पोस्टल बैलेट डाले गए, जिसमें एनडीए को 573 और महागठबंधन को 369 वोट मिले। इस्लामपुर में 999 डाक मतपत्रों में एनडीए को 569 और महागठबंधन को 352 वोट प्राप्त हुए। नालंदा विधानसभा क्षेत्र में 925 पोस्टल बैलेट पड़े, जिसमें एनडीए को 490 और विपक्षी गठबंधन को 333 वोट मिले। हिलसा में 864 डाक मतपत्रों में एनडीए को 488 और महागठबंधन को 295 मत मिले। राजगीर में 826 पोस्टल बैलेट के जरिए एनडीए को 444 तो महागठबंधन को 257 वोट प्राप्त हुए। हरनौत विधानसभा क्षेत्र में 820 डाक मतपत्रों में एनडीए ने 483 वोट हासिल किए, जबकि महागठबंधन को केवल 226 वोट मिले। अस्थावां में 775 पोस्टल बैलेट पड़े, जिसमें एनडीए को 409 और विपक्ष को 255 वोट मिले।
पोस्टल बैलेट की व्यवस्था
पोस्टल बैलेट की व्यवस्था उन मतदाताओं के लिए की जाती है जो अपने जन्मस्थान से दूर सेवा कर रहे हैं। इसमें सशस्त्र बलों के जवान, सरकारी अधिकारी और विदेश में तैनात कर्मचारी शामिल हैं। चुनाव आयोग पहले से ऐसे मतदाताओं की पहचान कर उन्हें डाक मतपत्र भेजता है। मतदाता अपनी पसंद के उम्मीदवार के चुनाव चिह्न पर निशान लगाकर इसे चुनाव आयोग के अधिकृत पदाधिकारी को वापस भेज देते हैं।